अध्याय 4
"क्या हो रहा है?" सीढ़ियों की तरफ़ से जेम्स की भारी आवाज़ गरजी। मैंने ऊपर देखा—वह तेज़ कदमों से नीचे उतर रहा था, उसका खूबसूरत चेहरा नाराज़गी से तना हुआ था।
"डैडी!"
इसाबेला झपटकर जेम्स की बाँहों में चढ़ गई, उससे लिपटकर बैठ गई और आँसुओं व चोट से भरी आँखों से मेरी तरफ़ उंगली उठा दी।
"आंटी सोफ़िया ने मुझे धक्का दिया… और मुझे बिना बाप की हरामी औलाद कहा!"
यह सुनते ही मेरा पूरा शरीर काँप गया। मुझे यक़ीन ही नहीं हुआ कि पाँच साल की बच्ची इतना ज़हरीला झूठ गढ़ सकती है।
"ये सच नहीं है, जेम्स। मैंने नहीं किया। उसने मेरी मेडिकल रिपोर्ट छीनी और फाड़ दी!"
मैं फर्श से उठने की कोशिश करने लगी; पेट के निचले हिस्से में मंद सा दर्द उठ रहा था। मैंने रिपोर्ट के टुकड़ों को जोड़कर उसे हमारे बच्चे के बारे में दिखाना चाहा, मगर जितना भी करती, कागज़ वापस जुड़ ही नहीं रहा था।
जेम्स ने मुझे बर्फ़ीली नज़र से देखा—उसकी आँखों की ठंडक ने मुझे ऐसा महसूस कराया जैसे मैं किसी हिम-गुफा में गिर गई हूँ। "सोफ़िया, इसाबेला ने बस एक बार मुझे ‘डैडी’ कहा, और तुमसे इतना भी बर्दाश्त नहीं हुआ?"
उसकी आवाज़ में साफ़ झुंझलाहट थी, मानो मुझसे एक शब्द और बोलना भी वक्त की बर्बादी हो।
ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरा दिल भींच लिया हो; दर्द इतना तेज़ कि साँस लेना मुश्किल हो गया। मेरे बस से बाहर, आँसू लगातार बहते रहे।
मुझे लगा था मैं इतने तूफ़ान झेल चुकी हूँ कि अब कठोर हो गई हूँ, पर जेम्स ने जब मुझ पर बिना आधार के इल्ज़ाम उछाले, मेरी सारी बनावटी शांति चूर-चूर हो गई।
"तुम मेरे बारे में यही सोचते हो?" मैंने साँस ली, उसे चुपचाप घूरते हुए, मेरी आवाज़ भारी और कड़वी थी। "मैं कितनी भी गिरी हुई क्यों न हूँ, किसी बच्चे के साथ ऐसा कभी नहीं कर सकती…"
"बस!" जेम्स ने मुझे तीखेपन से काट दिया, उसकी आँखों में घृणा और तंज भरा था। "प्रेग्नेंट? कब तक इस झूठ से मुझे बेवकूफ़ बनाती रहोगी? रॉबर्ट ने साबित कर दिया है कि तुम बिलकुल प्रेग्नेंट नहीं हो!"
"उससे गलती हुई। मैं आज फिर अस्पताल गई थी, दोबारा चेकअप के लिए। डॉक्टर ने साफ़ कहा कि मुझे तीन हफ्ते हो चुके हैं।" मैं हड़बड़ाकर झुक गई, फर्श पर पड़े टुकड़े उठाकर यह साबित करने की कोशिश करने लगी कि मैं सच बोल रही हूँ।
"देखो, ये मेडिकल रिपोर्ट है। फटी हुई है, फिर भी जोड़ो तो पढ़ी जा सकती है…"
"इसाबेला, अगर तुम्हें कुछ हो गया, तो मैं भी जीना नहीं चाहूँगी!" उसी पल अमेलिया अचानक बाहर दौड़ी आई—चेहरे पर आँसू, बेहद बेबस और दयनीय।
जेम्स के आस-पास बर्फ़ जैसी भारी तनावट थी, लेकिन उसके आते ही उस खामोश तूफ़ान का सबसे सर्द केंद्र पिघलने लगा।
"अमेलिया, इसाबेला ठीक है।"
उसकी आवाज़ थोड़ा खुरदरी निकली, जैसे खुद को रोक रहा हो, और उसका हाथ अमेलिया के कंधे को इतनी ज़ोर से पकड़े था कि उँगलियों की हड्डियाँ उभर आईं।
जेम्स की आँखों में जो तड़प थी, उसने मेरे भीतर एक अनकही जलन भर दी।
लोग कहते थे वह ठंडा और बेरुखा है, बहुत कम मुस्कुराता है—लेकिन सिर्फ़ मैं जानती थी कि अपनी सारी नरमी वह अमेलिया और इसाबेला पर ही लुटाता है।
"मुझे माफ़ कर दो। इसाबेला को जैस्पर की बहुत याद आ रही थी, इसलिए उसने सोफ़िया को नाराज़ कर दिया। सब मेरी ही गलती है। सोफ़िया, अगर तुम्हें गुस्सा है तो मुझ पर निकालो। इसाबेला तो बस… बहुत बेचारी है!"
मैंने मुँह भी नहीं खोला था, और उसने मेरे खिलाफ़ फैसला सुना दिया।
इतने घटिया, बचकाने हथकंडे—और फिर भी जेम्स, जिसने न जाने कितने तरह के लोगों से डील की थी, उन्हें भेद नहीं पा रहा था।
शायद बात यह नहीं थी कि वह भेद नहीं पा रहा था—वह भेदना ही नहीं चाहता था।
"आंटी सोफ़िया ने कहा कि मैं हरामी हूँ… और मुझे आपको डैडी कहने का हक़ नहीं…"
यह सब देखते हुए मेरे पेट में मरोड़-सी उठी।
अमेलिया और इसाबेला सुर में सुर मिलाकर बोल रही थीं, अपना पाखंडी नाटक बिल्कुल परफ़ेक्ट निभा रही थीं।
"इसाबेला से माफ़ी माँगो।" जेम्स ने भावहीन आँखों से मुझे घूरा, गहरी आवाज़ में हुक्म दिया—उसकी नज़र की घृणा जैसे मुझे पूरा निगल जाने वाली थी।
मैंने ज़िद में सिर हिला दिया, हाथ में उन टुकड़ों को कसकर पकड़े। "मैंने कुछ गलत नहीं किया। मैं माफ़ी क्यों माँगूँ?"
"तुम ढंग से रह क्यों नहीं सकतीं? पूरे घर का जीना हराम क्यों कर देती हो?" जेम्स आगे बढ़ा और उसने मेरी कलाई इतनी ज़ोर से पकड़ी कि लगा जैसे हड्डियाँ चूर हो जाएँगी।
दर्द से मेरा संतुलन लगभग बिगड़ गया, फिर भी मैंने ज़िद करके ठोड़ी ऊपर उठाई। "असल में मुसीबत कौन खड़ी कर रहा है? जेम्स, आँखें खोलकर देखो। शुरू से आखिर तक उकसाने वाले वही रहे हैं!"
"जेम्स, ऐसा मत करो..." अमेलिया ने दिखावे के लिए उसे रोकने की कोशिश की, मगर भीतर-ही-भीतर आग में घी डालती रही।
"सोफ़िया तुम्हारी इतनी फिक्र करती है कि मेरे और इसाबेला के प्रति दुश्मनी रखती है। अगर किसी को दोष देना है तो मुझे दो। मुझे इसाबेला को तुम्हें ‘पापा’ कहने ही नहीं देना चाहिए था..."
"बिलकुल नहीं देना चाहिए था!" मैं अचानक मुड़कर अमेलिया को घूरने लगी, सीने में दबा सारा आक्रोश उगलते हुए।
"वो तुम्हारे पति का भाई है, तुम्हारा पति नहीं! अमेलिया, मैं समझती हूँ पति को खोने के बाद तुम सालों से अकेली रही हो, लेकिन ये बात ठीक से समझ लो—जेम्स मेरा पति है!"
"सोफ़िया!" जेम्स गरजा और उसने मुझे ज़ोर से धक्का दे दिया।
मैं लड़खड़ाकर कई कदम पीछे गई, और मेरी कमर कॉफी टेबल के कोने से ज़ोर से टकराई। पेट में तेज़ चुभन उठी और पल भर में ही माथे पर ठंडा पसीना आ गया।
मैं सच में पूछना चाहती थी कि जेम्स का दिल आखिर किस चीज़ का बना है—मैं जितना भी उसे गर्म करने की कोशिश करूँ, वो पिघलता क्यों नहीं?
"बहुत हुआ!"
अचानक सीढ़ियों से इंडिगो की रौबीली आवाज़ गूँजी।
वो तेज़ी से नीचे उतरीं, उनका चेहरा गुस्से से तमतमाया हुआ था।
"जेम्स, तुम्हें सच-झूठ की पहचान ही नहीं रही!" इंडिगो ने जेम्स को घूरते हुए अपनी छड़ी उसके सीने पर ज़ोर से दे मारी। "सोफ़िया तुम्हारी पत्नी है!"
जेम्स की आँखों में गहरी, अटल ज़िद थी। "दादी, आप पक्षपात कर रही हैं।"
वो हमेशा इंडिगो का बहुत आदर करता था, फिर भी अमेलिया की खातिर वो उनके खिलाफ़ खड़ा होने को तैयार था।
इंडिगो गुस्से से काँप उठीं, उनकी छड़ी ज़मीन पर भारी आवाज़ के साथ पड़ी, मगर जैसे उसके दिल तक पहुँच ही नहीं पा रही थी।
"मैं उसके खिलाफ़ पक्षपात कर रही हूँ? जेम्स, क्या तुम्हें याद नहीं जैस्पर कैसे मरा था? अगर उसने ज़िद करके जैस्पर को डाइविंग के लिए घसीटा न होता तो जैस्पर कैसे..."
"दादी!" अमेलिया धम्म से घुटनों के बल गिर पड़ी, और फूट-फूटकर रोने लगी।
"उस वक्त जो हुआ, मेरी गलती थी। इतने सालों से मैं इसी दर्द में जी रही हूँ। अगर इसाबेला न होती, तो मैं कब की जैस्पर के साथ मर चुकी होती!" उसने आँसू से भरा चेहरा उठाकर इंडिगो की ओर ऐसे देखा जैसे कुछ जता रही हो, फिर अचानक उठी और टेबल के कोने की तरफ दौड़ पड़ी। "जैस्पर, इस घर में मेरे लिए जगह नहीं है। मैं आ रही हूँ, तुम्हारे पास!"
इसाबेला ज़ोर-ज़ोर से रो पड़ी, चीखकर बोली, "मम्मी, मत जाओ!"
जेम्स ने तुरंत उसे अपनी बाँहों में थाम लिया, जैसे कोई अनमोल चीज़ हो। "अमेलिया, कोई बेवकूफी मत करना।"
उसने सिर झुकाया, उसकी नज़रें सबसे नरम पंख की तरह चलती हुई, हल्के से उसके आँसू-भीगे गालों पर फिर गईं।
जेम्स ने मुझे कभी एक पल के लिए भी ऐसी समर्पित निगाहों से नहीं देखा था।
जेम्स और मेरे बीच, उसके दिल ने मेरे लिए ऊँची दीवारें खड़ी कर रखी थीं। मैं उन पर टकराती रही—लहूलुहान, जख्मी—और अमेलिया को बस भौंह सिकोड़नी होती, और वो बिना हिचक पूरे किले की चाबियाँ उसके हाथ में रख देता।
"तुम..."
उन्हें यूँ एक-दूसरे से चिपका हुआ देख, इंडिगो ने अमेलिया की तरफ उँगली उठाई। उनका सीना तेज़ी से उठ-गिर रहा था, और उनका चेहरा अचानक पीला पड़ गया।
मुझे कुछ गड़बड़ लगी, और मैं पेट के दर्द को ज़ोर से दबाकर इंडिगो को संभालने बढ़ी। "दादी, क्या हुआ?"
इंडिगो हाँफने लगीं, उनके माथे पर पसीने की महीन बूँदें उभर आईं। उनके मुँह से एक शब्द नहीं निकल पा रहा था।
"दादी!" जेम्स भी घबरा गया और जल्दी से आगे आकर इंडिगो को सहारा देने लगा।
इंडिगो की साँसें और तेज़ होती गईं। उन्होंने दर्द से आँखें मूँद लीं और सीने को कसकर पकड़ लिया।
मैंने पेट के दर्द को सहते हुए काँपते हाथों से इमरजेंसी नंबर मिलाया।
ड्रॉइंग रूम में अफरा-तफरी मच गई। इसाबेला डर के मारे काँप रही थी और जोर-जोर से रोने लगी।
